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जबसे सूचना का अधिकार कार्यकर्ता लोकेश खुराना के सक्रिय होने के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा कच्ची कॉलोनियों अवैध निर्माणों और भूपयोग में कुछ और व मौके पर कुछ और का निर्माण करने वालों में अफरा तफरी मची है। जब से अदालत का आदेश हुआ कि हर निर्माण की सूची मेडा वीसी अपने व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ देते मेडा अफसरों की परेशानी बढ़ गई है। अभी तक जो वो अपने सहयोगियों की तरफ से निगाह हटाए बैठे थे और अब जोन प्रभारी बचने वाले नहीं है। विभाग के जेई व जोन प्रभारी आंख मींचकर अवैध निर्माण करने वालों को बचाने हेतु आज भी शिकायतों का फर्जी निस्तारण कर रहे हैं। तो अवैध निर्माण करने वाले बिल्डर भी अपनी जान बचाने के लिए सक्रिय हो गए हैं। इसके उदाहरण के रुप में मानचित्र पास बनाकर गढ़ रोड पर आरएस स्टेट द्वारा एसके होल्डिंग प्रोजेक्ट से दो कॉमर्शियल बहुमंजिले निर्माण किए गए हैं। उन्हें बेचने के लिए निकाला गया है। लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि जब इतना बड़ा विवाद चल रहा है तो और कोई इसमें करोड़ों रुपये क्यों खपाएगा। जबकि इसका मानचित्र भी स्पष्ट नहीं है। कुछ लोगों काकहना है कि यह रिहायशी है अगर ऐसा है तो पूरे निर्माण में कॉमर्शियल नहीं हो सकता इससे यह अवैध होने के साथ सााथ अफसरों से मिलीभगत करके गलत तरीके से नक्शा पास कराया गया होगा। अगर सबकुछ सही मान लिया जाए तो यह नक्शा किसी भी रुप में पास नहीं हो सकता। दूसरी तरफ कुछ लोगों का यह भी कहना है कि मानचित्र पास था तो बाहर क्यों नहीं लगाया गया। कई जानकारों का यह कथन सही लगता है कि नक्शा पास भी है तो जो फ्रंट सैटबैक छोड़ना चाहिए और सड़क से जितनी दूरी कॉम्पलैक्स की रखी जाए वो भी जगह मानक के अनुसार नहीं छोड़ी गई है। इन कॉम्पलैक्स की जांच मुख्यमंत्री जी किसी प्रशासनिक अधिकारी से करा ली जाए तो मेडा के इंजीनियर जोन प्रभारी की कार्यप्रणली स्पष्ट खुलकर सामने आ सकती है। जांच में इसकी जमीन की रजिस्ट्री किस उपयोग में हुई है इस पर भी ध्यान दिया जाए।