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पूर्वी दिल्ली. आठ साल तक घर में बच्चे की किलकारी गूंजने का इंतजार किया। फिर मन्नतों के बाद बेटी ने जन्म लिया तो माता-पिता की दुनिया ही बदल गई। वह उनके लिए सिर्फ बेटी नहीं, बल्कि बरसों की दुआओं का फल थी। उसकी एक मुस्कान से घर खिल उठता था।
पिता अपनी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं होने के बावजूद उसे इलाके के अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे थे तो मां ने भी उसके बेहतर भविष्य के लिए अपने सपनों को पीछे छोड़ दिया। शादी के बाद बीएड करने वाली मां कभी शिक्षिका बनना चाहती थीं, लेकिन बेटी के जन्म के बाद उन्होंने अपना कॅरिअर छोड़कर उसकी परवरिश को ही अपनी जिंदगी बना लिया।
उन्हें क्या पता था कि जिस बेटी के लिए उन्होंने अपने सारे सपने कुर्बान कर दिए वह एक दिन इस तरह हमेशा के लिए उनसे दूर हो जाएगी। दिल्ली के मयूर विहार स्थित स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली नौ साल की बच्ची की मौत ने खुशियां छीन लीं। पिता मौलाना आजाद अस्पताल में एंबुलेंस चलाते हैं और शाम को जिम में ट्रेनिंग देते हैं। बेटी की पढ़ाई, उसकी पसंद और उसकी खुशियां ही दुनिया थी।
पिता के साथ जिम जाना और चाचा के साथ बैडमिंटन खेलना था पसंद
बेटी को भी खेलकूद का शौक था। उसे बैडमिंटन खेलना बेहद पसंद था। वह अक्सर अपने पिता और चाचा के साथ बैडमिंटन खेलती थी। पिता जब शाम को जिम जाते तो कई बार वह भी उनके साथ चली जाती थी। घर में उसकी चंचलता और खेल के किस्से परिवार के लिए खुशियों की वजह होते थे। किसी ने नहीं सोचा था कि खेलकूद की शौकीन इस बच्ची के जीवन का अंत स्कूल में इस तरह हो जाएगा।
थाने में बेटी को याद कर रोती रही मां हुई बेसुध
खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां के लिए यह सदमा असहनीय था। रोते-रोते उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि वह बेहोश हो गईं। पिता के परिवार में दो भाई और दो बहनें हैं। बच्ची के चाचा ग्राफिक डिजाइनर हैं, जबकि दादा नगर निगम में कार्यरत हैं। परिवार के लिए बेटी सबकी लाडली थी।
तीसरी कक्षा में पढ़ती थी छात्रा
छात्रा मयूर विहार फेज-2 स्थित निजी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ती थी। बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे उसके पिता उसे स्कूल छोड़कर आए थे। करीब 10 बजे परिवार को स्कूल से बेटी की तबीयत खराब होने की सूचना मिली। घर पर मौजूद उसकी मां तुरंत स्कूल की ओर रवाना हुईं।